संगठन की प्रतिज्ञा
प्रत्येक सदस्य का भारत माता और सनातन धर्म के प्रति वचन
यह प्रतिज्ञा संगठन के प्रत्येक सदस्य द्वारा, पूर्ण अंतःकरण से, राष्ट्र और धर्म को साक्षी मानकर ली जाती है।
"मैं सर्वशक्तिमान परमेश्वर, सनातन धर्म, और भारत माता को साक्षी मानकर यह प्रतिज्ञा करता/करती हूँ कि—"
मैं अपने धर्म, अपनी संस्कृति, और अपने राष्ट्र की रक्षा व उन्नति के लिए पूर्णतः समर्पित रहूँगा/रहूँगी।
मैं हिन्दू समाज के सभी भेदों—जाति, स्वरूप, भाषा, और वर्ग—को त्यागकर, सभी के साथ पारिवारिक भाव से व्यवहार करूँगा/करूँगी।
मैं अपने परिवार में सनातन संस्कारों का सिंचन करूँगा/करूँगी और नई पीढ़ी को धर्म और राष्ट्रबोध का महत्व समझाऊँगा/समझाऊँगा।
मैं नियमित रूप से 'साप्ताहिक हिन्दू समागम' का आयोजन या उसमें सहभागिता करूँगा/करूँगी, ताकि संगठनात्मक शक्ति और सामूहिक जागरण का विस्तार हो सके।
मैं समाज के अशक्त, अभावग्रस्त और शोषित वर्गों की सेवा के लिए तत्पर रहूँगा/रहूँगी।
मैं राष्ट्रीय हिन्दू संगठन के अनुशासन का पालन करूँगा/करूँगी और इसके वैचारिक व व्यावहारिक कार्यों में अपना समय, शक्ति और विचार समर्पित करूँगा/करूँगी।
भारत माता की जय!
धर्म की जय हो!
क्या आप इस प्रतिज्ञा को सहर्ष स्वीकार करते हैं?
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