हमारे विषय में
सनातन धर्म, संस्कृति, और राष्ट्रभाव के लिए समर्पित एक वैचारिक और संगठनात्मक यात्रा।
"राष्ट्रीय हिन्दू संगठन सनातन मूल्यों, सामाजिक संगठन, सेवा, समरसता, संस्कार और राष्ट्रबोध पर आधारित एक सशक्त मंच है।"
हमारा दृष्टिकोण Our Vision
हमारा मानना है कि हिन्दू समाज केवल एक उपासना-पद्धति का समूह नहीं, बल्कि विश्व-कल्याण, सहिष्णुता और 'वसुधैव कुटुम्बकम्' के आदर्शों को जीने वाला एक महान राष्ट्र-शरीर है।
इस कालखंड में, जब समाज विभिन्न चुनौतियों, विघटनकारी शक्तियों और वैचारिक भ्रम का सामना कर रहा है, तब एक जाग्रत, अनुशासित और संस्कारित संगठन ही समाज की रक्षा और राष्ट्र का उत्थान कर सकता है।
संगठन का स्वरूप
राष्ट्रीय हिन्दू संगठन कोई राजनीतिक मंच नहीं है, यह विशुद्ध रूप से एक सामाजिक, सांस्कृतिक और वैचारिक आंदोलन है। हम समाज के प्रत्येक वर्ग, प्रत्येक जाति और प्रत्येक भाषा-भाषी को एक ही सूत्र में पिरोते हैं— हिन्दुत्व और राष्ट्रबोध
हमारी कार्यपद्धति
साप्ताहिक समागम
समाज के परिवारों को एकत्र कर स्वाध्याय, चर्चा और संस्कार-निर्माण।
प्रशिक्षण वर्ग
युवाओं और कार्यकर्ताओं के लिए बौद्धिक और शारीरिक प्रशिक्षण।
सेवा कार्य
आपदा प्रबंधन, शिक्षा संवर्धन, स्वास्थ्य शिविर एवं गो-सेवा।
संगठन के पंच-स्तंभ
इन पांच मूल स्तंभों पर हमारे राष्ट्रोत्थान और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का वैचारिक महल टिका हुआ है।
धर्म एवं संस्कृति
वैदिक सनातन ज्ञान की पुनर्स्थापना करना और नई पीढ़ी को हमारे समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संस्कारों से जोड़ना।
सामाजिक समरसता
समाज के अंदर से जाति-भेद, ऊंच-नीच के कृत्रिम बंधनों को समाप्त कर समरस और अखंड हिन्दू समाज का निर्माण करना।
राष्ट्रबोध (Patriotism)
देश-प्रथम की चेतना जागृत करना तथा समाज को अपने अधिकारों के साथ-साथ राष्ट्रीय कर्तव्यों का बोध कराना।
अखंड सेवा भाव
विपदा के समय निःस्वार्थ समाज सेवा, निर्धन बच्चों की शिक्षा, चिकित्सा सहायता शिविर एवं गौ-सेवा अभियानों का संचालन।
युवा नेतृत्व व संस्कार
युवाओं में श्रेष्ठ नैतिक मूल्य भरना और उन्हें समाज का नेतृत्व करने के लिए बौद्धिक रूप से सशक्त बनाना।
हमारी संगठनात्मक विकास यात्रा
एक वैचारिक बीज से लेकर एक विराट संगठनात्मक वटवृक्ष बनने की ऐतिहासिक विकास यात्रा।
संगठनात्मक संकल्प एवं आधारशिला
सनातन मूल्यों के संरक्षण और हिन्दू समाज को एकजुट करने के दृढ़ वैचारिक संकल्प के साथ संगठन की आधारशिला रखी गई। प्रथम मार्गदर्शक मंडल की बैठक में कार्यपद्धति की रूपरेखा तय हुई।
साप्ताहिक समागम व खंड स्तर पर फैलाव
ग्रामीण और शहरी अंचलों में 'साप्ताहिक हिन्दू समागम' के प्रारूप को व्यापक रूप से लागू किया गया। प्रत्येक जिले में वैचारिक गोष्ठी, शस्त्र पूजा, और युवाओं के शारीरिक प्रशिक्षण वर्गों की शुरुआत हुई।
RHS Community App व डिजिटल शिकायत निवारण (IGRS)
कार्यकर्ताओं को जोड़ने के लिए अत्याधुनिक 'RHS Community App' लॉन्च किया गया। इसके साथ ही, समाज की समस्याओं के निवारण हेतु अत्याधुनिक डिजिटल शिकायत निवारण (IGRS) पोर्टल की शुरुआत हुई, जिससे हजारों शिकायतें सीधे और पारदर्शी रूप से हल हुईं।
हमारा मार्गदर्शक मंडल एवं नेतृत्व
सनातन संस्कृति के पथ-प्रदर्शक विद्वान और राष्ट्रनिर्माण को समर्पित ऊर्जावान नेतृत्व।
सत्येन्द्र दुबे
संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्षसंगठन की स्थापना के प्रणेता, जिन्होंने युवाओं में राष्ट्रबोध और सनातन चेतना को पुनर्जीवित करने के लिए डिजिटल और वैचारिक आंदोलन खड़ा किया।
इन्द्र कुमार चतुर्वेदी
राष्ट्रीय मार्गदर्शक व संरक्षकशास्त्रों and सनातन दर्शन के प्रकांड विद्वान, जिनका परम ज्ञान और मार्गदर्शन हमारे संपूर्ण सांगठनिक ढाँचे को वैचारिक दिशा और शुद्धता प्रदान करता है।
अभिषेक चौरसिया
National IT Headडिजिटल और तकनीकी रणनीतिकार, जिन्होंने संगठन के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, RHS Community App और पारदर्शी शिकायत निवारण (IGRS) प्रणाली का निर्माण किया।
हमारा आह्वान
हम देश के प्रत्येक हिन्दू परिवार का आह्वान करते हैं कि वे अपने आस-पास के हिन्दू परिवारों से संपर्क करें, साप्ताहिक समागम प्रारंभ करें, अपने बच्चों को सनातन संस्कार दें, और समाज तथा राष्ट्र के प्रति अपने उत्तरदायित्व को समझें।
संगठन से जुड़ें